GSEB Std 7 Hindi Chapter 8 Doha Ashtak Swadhyay Solution, Abhyas & Bhasha Sajjata: અહીં ધોરણ 7 હિન્દી વિષયના પ્રકરણ 8 "दोहा अष्टक" (કબીર, તુલસીદાસ અને રહીમના દોહા) નો કાવ્ય સારાંશ, અભ્યાસ, સ્વાધ્યાય, વિલોમ શબ્દો, દોહાનો ભાવાર્થ તેમજ ભાષા-સજ્જતા (પ્રશ્નવાચક અને સંબંધવાચક સર્વનામ વ્યાકરણ) નું સંપૂર્ણ સોલ્યુશન પાઠ્યપુસ્તક આધારિત સુંદર રીતે પ્રસ્તુત કરવામાં આવ્યું છે.
✦ કાવ્ય સારાંશ (दोहों का सारांश) ✦
'दोहा अष्टक' में संत कबीर, गोस्वामी तुलसीदास और रहीम के नीतिपरक दोहों का अनमोल संकलन प्रस्तुत किया गया है[cite: 112, 113]। ये दोहे व्यावहारिक दृष्टांतों के माध्यम से हमें जीवन के उच्च आदर्श, लोक-व्यवहार, सज्जनता, परोपकार और नीति-रीति की गहरी सीख देते हैं[cite: 112]।
कबीरदास जी कहते हैं कि खजूर के पेड़ की तरह केवल बड़ा होने से कोई लाभ नहीं, जिससे न राही को छाया मिले और न आसानी से फल[cite: 112]। साधु पुरुष को सूप के समान होना चाहिए, जो सारयुक्त अच्छी बातों को ग्रहण करे और कचरे रूपी बुराइयों को उड़ा दे[cite: 112]। वे गुड़ में फंसी मक्खी के उदाहरण से समझाते हैं कि लालच मनुष्य के पतन का कारण बनता है[cite: 112]। गोस्वामी तुलसीदास जी समाज में नदी-नाव संयोग की तरह सभी से हिल-मिलकर रहने का उपदेश देते हैं और निर्धन व असहाय व्यक्ति को न सताने की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि मृत पशु के चमड़े से बनी धौंकनी से भी लोहा भस्म हो जाता है, अतः गरीब की बददुआ कभी व्यर्थ नहीं जाती[cite: 112]। रहीम जी प्रेम रूपी नाज़ुक धागे को न तोड़ने की सलाह देते हैं, क्योंकि टूटने के बाद जुड़ने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है[cite: 113]। वे वृक्ष और सरोवर के परोपकारी स्वभाव की तरह सज्जनों को दूसरों के कल्याण हेतु धन-संग्रह करने तथा किसी बड़े के मिलने पर छोटे की उपेक्षा न करने का संदेश देते हैं, क्योंकि जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती[cite: 113]।
✦ અભ્યાસ (Std 7 Hindi Chapter 8 Abhyas Solution) ✦
1. निम्नलिखित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दीजिए :
(1) बड़े लोगों की संकुचित मनोस्थिति व्यक्त करने के लिए खजूर के पेड़ का उदाहरण क्यों दिया गया है ?
उत्तर : खजूर का पेड़ आकार में बहुत ऊँचा और बड़ा होता है, परंतु उससे न तो पथिक को बैठने के लिए छाया मिलती है और उसके फल भी बहुत दूर (ऊँचाई पर) लगते हैं[cite: 112]। इसी प्रकार समाज के जो धनवान या बड़े लोग किसी ज़रूरतमंद के काम नहीं आते और परोपकार नहीं करते, उनका बड़प्पन व्यर्थ है।
(2) साधु पुरुष कैसा होना चाहिए ? क्यों ?
उत्तर : साधु पुरुष को सूप (अनाज फटकने वाले छाज) के स्वभाव जैसा होना चाहिए[cite: 112]। क्योंकि जिस तरह सूप अनाज के अच्छे दानों को अपने पास रख लेता है और व्यर्थ भूसे-कचरे को उड़ा देता है, उसी प्रकार सज्जन पुरुष को संसार से केवल अच्छी बातों और गुणों को अपनाना चाहिए तथा दोषों को त्याग देना चाहिए[cite: 112]।
(3) तुलसीदास सब से हिल-मिलकर रहने को क्यों कहते हैं ?
उत्तर : तुलसीदास जी कहते हैं कि इस संसार में तरह-तरह के स्वभाव वाले लोग रहते हैं[cite: 112]। मानव जीवन में हमारा एक-दूसरे से संपर्क नदी और नाव के संयोग के समान क्षणिक और सीमित समय का होता है[cite: 112]। इसलिए हमें आपसी कटुता त्यागकर सबके साथ प्रेम, सौहार्द और सहयोग से मिलकर रहना चाहिए[cite: 112, 113]।
(4) आप गरीब लोगों की मदद कैसे कर सकते हैं ?
उत्तर : हम गरीब लोगों को भोजन, पुराने कपड़े, पुस्तकें, दवाइयाँ और ज़रूरत की वस्तुएँ देकर सहायता कर सकते हैं। इसके अलावा निर्धन बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाकर तथा संकट के समय उनके काम आकर हम उनकी मदद कर सकते हैं।
(5) सज्जन लोग अपनी संपत्ति का उपयोग कैसे करते हैं ?
उत्तर : सज्जन लोग अपनी संपत्ति का संग्रह अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों की भलाई (परोपकार) और जनकल्याण के कार्यों के लिए करते हैं[cite: 113]।
2. नीचे दिए गए शब्दों में विलोम शब्दों के सही जोड़े बनाइए और उदाहरण के अनुसार वाक्य में प्रयोग कीजिए :
शब्द : आदर, स्वकाज, बुरा, परकाज, प्रेम, नजदीक, नफ़रत, मृत, अच्छा, अनादर, जीवित, छोटा, दूर, बड़ा, असत्य, सत्य[cite: 114]
(1) सत्य × असत्य
- वाक्य (सत्य) : गांधीजी हमेशा सत्य बोलते थे[cite: 114]।
- वाक्य (असत्य) : हमें कभी असत्य नहीं बोलना चाहिए[cite: 114]।
(2) आदर × अनादर
- वाक्य (आदर) : हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।
- वाक्य (अनादर) : हमें किसी भी व्यक्ति का अनादर नहीं करना चाहिए।
(3) अच्छा × बुरा
- वाक्य (अच्छा) : हमें सदैव अच्छा आचरण करना चाहिए।
- वाक्य (बुरा) : बुरा काम करने वाले को बुरा फल मिलता है।
(4) प्रेम × नफ़रत
- वाक्य (प्रेम) : सभी प्राणियों के साथ प्रेम से रहना चाहिए।
- वाक्य (नफ़रत) : हमें किसी से नफ़रत या ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।
(5) स्वकाज × परकाज
- वाक्य (स्वकाज) : स्वार्थी मनुष्य केवल अपने स्वकाज की चिंता करता है।
- वाक्य (परकाज) : सज्जन लोग परकाज हित के लिए धन खर्च करते हैं[cite: 113]।
(6) नजदीक × दूर
- वाक्य (नजदीक) : मेरा विद्यालय मेरे घर के बहुत नजदीक है।
- वाक्य (दूर) : खजूर के पेड़ के फल बहुत दूर लगते हैं[cite: 112]।
(7) जीवित × मृत
- वाक्य (जीवित) : दुर्घटना में सभी यात्री जीवित बच गए।
- वाक्य (मृत) : मुए (मृत) ढोर के चाम से भस्म हो जाती है[cite: 112]।
(8) बड़ा × छोटा
- वाक्य (बड़ा) : बड़प्पन बड़ा काम करने से मिलता है।
- वाक्य (छोटा) : किसी भी छोटे काम या व्यक्ति को तुच्छ नहीं समझना चाहिए[cite: 113]।
3. अंदाज अपना-अपना : अकाल में परेशान लोगों की मदद कैसे करोगे ?
उत्तर : अकाल (सूखे) के समय पीड़ित लोगों और मूक पशु-पक्षियों की सहायता के लिए हम अपनी पॉकेट मनी से राहत कोष में आर्थिक योगदान देंगे[cite: 114]। हम अपने मित्रों और पड़ोसियों के साथ मिलकर अनाज, दालें, पीने का शुद्ध पानी और आवश्यक दवाइयाँ एकत्र करके प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाएँगे। इसके साथ ही भूखे पशुओं के लिए घास और चारे की व्यवस्था करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों में पानी के टैंकर भिजवाने का हरसंभव प्रयास करेंगे।
4. निम्नलिखित दोहों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए :
(1) "साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय ॥"[cite: 112, 114]
भावार्थ : कबीरदास जी कहते हैं कि सज्जन और ज्ञानी पुरुष का स्वभाव अनाज साफ करने वाले सूप के समान होना चाहिए[cite: 112, 113]। जिस प्रकार सूप अनाज के ठोस और उपयोगी दानों को अपने पास रख लेता है और बेकार हल्के भूसे को उड़ा देता है, उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति को संसार की सारयुक्त अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए और व्यर्थ की बातों को छोड़ देना चाहिए[cite: 112, 113]।
(2) "तुलसी हाय गरीब की, कबहूँ न खाली जाय।
मुए ढोर के चाम से, लौह भस्म हो जाय ॥"[cite: 112, 114]
भावार्थ : गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि निर्धन और कमज़ोर व्यक्ति को सताने पर उसके हृदय से निकलने वाली बददुआ (हाय) कभी निष्फल नहीं जाती[cite: 112, 113]। जैसे मरे हुए पशु के चमड़े से बनी धौंकनी की फूँक से कठोर लोहा भी जलकर भस्म हो जाता है, वैसे ही सताए गए गरीब की आह अत्याचारी का सर्वनाश कर देती है[cite: 112, 113]।
(3) "रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि ॥"[cite: 113, 114]
भावार्थ : रहीम जी कहते हैं कि किसी बड़े और प्रतिष्ठित व्यक्ति या वस्तु को पाकर हमें छोटे और साधारण व्यक्ति अथवा वस्तु की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए[cite: 113]। कपड़े सीने का काम सुई ही कर सकती है, वहाँ विशाल और तीखी तलवार किसी काम नहीं आ सकती; संसार में सबका अपना विशिष्ट महत्व होता है[cite: 113]।
✦ સ્વાધ્યાય સોલ્યુશન (Std 7 Hindi Chapter 8 Swadhyay Solution) ✦
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(1) साधु कैसा होना चाहिए ?
उत्तर : साधु सूप के स्वभाव वाला होना चाहिए, जो दूसरों के गुणों और सारयुक्त विचारों को ग्रहण करे तथा दोषों और निरर्थक बातों को त्याग दे[cite: 112]।
(2) कबीर जी लालच को क्यों बुरी चीज कहते हैं ?
उत्तर : कबीर जी लालच को बुरी बला इसलिए कहते हैं क्योंकि लालच में पड़कर मनुष्य अपना विवेक खो बैठता है और संकट में फँस जाता है[cite: 112]। जिस प्रकार मीठे के लालच में मक्खी गुड़ पर बैठती है और उसके पंख चिपक जाने पर वह पछताती हुई मर जाती है, उसी प्रकार लोभी मनुष्य का भी पतन हो जाता है[cite: 112]।
(3) तुलसीदास सब से हिल-मिलकर रहने को क्यों कहते हैं ?
उत्तर : क्योंकि संसार में विभिन्न विचारों और स्वभावों के लोग रहते हैं[cite: 112]। जिस तरह नदी और नाव का साथ केवल पार उतरने तक का होता है, उसी प्रकार जीवन में हमारा मिलना भी सीमित समय के लिए है, अतः प्रेमपूर्वक मिल-जुलकर रहना चाहिए[cite: 112]।
(4) 'गरीब की हाय' के लिए कौन-सा उदाहरण दिया गया है ?
उत्तर : 'गरीब की हाय' के लिए मरे हुए पशु के चमड़े से बनी लोहार की धौंकनी का उदाहरण दिया गया है, जिसकी हवा से कठोर लोहा भी भस्म हो जाता है[cite: 112]।
(5) रहीम प्रेम का धागा तोड़ने के लिए क्यों मना करते हैं ?
उत्तर : रहीम जी प्रेम के धागे को झटके से तोड़ने के लिए इसलिए मना करते हैं क्योंकि एक बार संबंध टूट जाने पर वह दोबारा आसानी से नहीं जुड़ता और यदि जुड़ भी जाए, तो उसमें पहले जैसा सहज भाव नहीं रहता बल्कि मन में अविश्वास की गाँठ पड़ जाती है[cite: 113]।
✦ ભાષા-સજ્જતા (Std 7 Hindi Chapter 8 Bhasha Sajjata) ✦
• प्रश्नवाचक सर्वनाम : संज्ञा के विषय में जिन शब्दों से प्रश्न पूछा जाए, वे 'प्रश्नवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं। (जैसे : कौन, किसे, क्या, किसने आदि)[cite: 115]
• संबंधवाचक सर्वनाम : वाक्य में दो संज्ञाओं अथवा सर्वनामों के परस्पर संबंध का बोध कराने वाले सर्वनाम 'संबंधवाचक सर्वनाम' कहलाते हैं। (जैसे : जैसा-वैसा, जो-वह, जिसकी-उसकी आदि)[cite: 115, 116]
1. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को 'प्रश्नवाचक' और 'संबंधवाचक' सर्वनाम में वर्गीकृत कीजिए :
• प्रश्नवाचक सर्वनाम वाले वाक्य :
(1) वह कौन आ रहा है ? → कौन[cite: 116]
(4) आज का इनाम किसे मिलेगा ? → किसे[cite: 116]
(6) आप क्या ढूँढ़ रहे हैं ? → क्या[cite: 116]
(7) किसने कहा आज मेहमान आएँगे ? → किसने[cite: 116]
• संबंधवाचक सर्वनाम वाले वाक्य :
(2) जैसी करनी वैसी भरनी। → जैसी - वैसी[cite: 116]
(3) जो चलता रहेगा, वह मंजिल तक पहुँचेगा। → जो - वह[cite: 116]
(5) जिसकी मेहनत उसकी सफलता। → जिसकी - उसकी[cite: 116]
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